( सुमित हिंदी कविता के युवतम स्वर हैं । कविताओं के बारे में मेरे कहने से ज्यादा यह कविताएँ आपसे खुद संवाद करें तो अच्छा है । 'उम्मीद' ब्लॉग सुमित को उनकी रचनात्मकता के लिए शुभकामनायें देता है और उनको यहाँ होने के लिए अपना आभार भी प्रकट करता है । - मॉडरेटर )
1.
जी.बी.रोड"
आज मैं जी.बी.रोड होना चाहती हूँ इलाहबाद, महाराष्ट्र
और बंगाल होना चाहती हूँ एशिया की सबसे बड़ी
बाज़ार होना चाहती हूँ
आज मैं तुम्हारी सरकार होना चाहती हूँ जिससे हर कोई मंत्री
पाँच मिनट में बदल दे अपनी एंट्री
मैं संसद होना चाहती हूँ समुद्र मंथन होना चाहती हूँ मैं तुम्हारे किए की
हर वो बीज होना चाहती हूँ
जो फिर से कहे
आज भी मैं जी.बी.रोड होना चाहती हूँ ।
2
"दौलत के दांत"
आज के इस दौर में
दौलत के दांतों से
नाखूनों के ख़ंजर से
और गुब्बारे के दिल से मिलते हैं रिश्ते बड़ी मुश्किल से नया हो गया है
रिश्तों का बुत
और ढ़ह गई है जाति की खाई
ले लिया है उसका स्थान उपजाति ने
उप दौलत ने
उप धर्म ने
और लिया है स्थान उपदेश ने क्योंकि बदलते हुए भूगोल का सपना बदल नहीं सकता
सूरज का उगना टल नहीं सकता हवाओं का बहना रुक नहीं सकता रुक सकता है केवल और केवल रिश्तों का बुत, रिश्तों का बुत आज के इस दौर में
आज के इस दौर में...
3
"हाँ मैं हूँ देशद्रोही"
जब-जब इतिहास में
झांककर देखता हूँ
तो नज़र आती है लंबी कतार देशद्रोहियों की
पहला देशद्रोही जयचंद था दूसरा था राणा सांगा
तीसरा देशद्रोही तुम हो
जो कभी ले न सके देश का हाल और भोक दिया ख़ंजर
अपने ही राष्ट्रपिता को देशद्रोही कह कर
और चौथा देशद्रोही मैं हूँ क्योंकि मैं आज़ादी की बात करता हूँ बस्तर की आवाज़ उठाता हूँ कुचली बहनों की आवाज़ उठाता हूँ कुचले लोगों की आवाज़ उठाता हूँ अन्नदाता की आवाज़ उठाता हूँ अल्लाह और ईश्वर की इबादत करता हूँ तुम्हारी हाँ में न करता हूँ करता हूँ मैं हर वो काम
जो तुम्हें नहीं है पसंद इसीलिए हूँ मैं देशद्रोही क्योंकि तुम्हारे गणतंत्र में लुटती हुई आबरू
चीखता हुआ इंसान
गर्भ पाल कर मजदूरी करती स्त्री पेड़ पर लटकता हुआ अन्नदाता बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण करने वाला मजदूर और हाथ फैला कर भीख मांगता हुआ बच्चा भारत का भविष्य नहीं बन सकता बन सकता है वो
केवल देशद्रोही, केवल देशद्रोही वह भारत का भाग्य विधाता भी बन सकता है जैसे इतिहासों में दर्ज है हज़ारो नाम
अम्बेडकर से लेकर कलाम तक लेकिन अब नहीं होगा ऐसा क्योंकि अब जो भी बनेगा इनकी तरह वह होगा देशद्रोही
वह होगा देशद्रोही
पता :-
सुमित चौधरी
शोधार्थी
भारतीय भाषा केंद्र
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली- 110067
मोबाइल-9654829861
Email.sumitchaudhary825@gmail.com
1.
जी.बी.रोड"
आज मैं जी.बी.रोड होना चाहती हूँ इलाहबाद, महाराष्ट्र
और बंगाल होना चाहती हूँ एशिया की सबसे बड़ी
बाज़ार होना चाहती हूँ
आज मैं तुम्हारी सरकार होना चाहती हूँ जिससे हर कोई मंत्री
पाँच मिनट में बदल दे अपनी एंट्री
मैं संसद होना चाहती हूँ समुद्र मंथन होना चाहती हूँ मैं तुम्हारे किए की
हर वो बीज होना चाहती हूँ
जो फिर से कहे
आज भी मैं जी.बी.रोड होना चाहती हूँ ।
2
"दौलत के दांत"
आज के इस दौर में
दौलत के दांतों से
नाखूनों के ख़ंजर से
और गुब्बारे के दिल से मिलते हैं रिश्ते बड़ी मुश्किल से नया हो गया है
रिश्तों का बुत
और ढ़ह गई है जाति की खाई
ले लिया है उसका स्थान उपजाति ने
उप दौलत ने
उप धर्म ने
और लिया है स्थान उपदेश ने क्योंकि बदलते हुए भूगोल का सपना बदल नहीं सकता
सूरज का उगना टल नहीं सकता हवाओं का बहना रुक नहीं सकता रुक सकता है केवल और केवल रिश्तों का बुत, रिश्तों का बुत आज के इस दौर में
आज के इस दौर में...
3
"हाँ मैं हूँ देशद्रोही"
जब-जब इतिहास में
झांककर देखता हूँ
तो नज़र आती है लंबी कतार देशद्रोहियों की
पहला देशद्रोही जयचंद था दूसरा था राणा सांगा
तीसरा देशद्रोही तुम हो
जो कभी ले न सके देश का हाल और भोक दिया ख़ंजर
अपने ही राष्ट्रपिता को देशद्रोही कह कर
और चौथा देशद्रोही मैं हूँ क्योंकि मैं आज़ादी की बात करता हूँ बस्तर की आवाज़ उठाता हूँ कुचली बहनों की आवाज़ उठाता हूँ कुचले लोगों की आवाज़ उठाता हूँ अन्नदाता की आवाज़ उठाता हूँ अल्लाह और ईश्वर की इबादत करता हूँ तुम्हारी हाँ में न करता हूँ करता हूँ मैं हर वो काम
जो तुम्हें नहीं है पसंद इसीलिए हूँ मैं देशद्रोही क्योंकि तुम्हारे गणतंत्र में लुटती हुई आबरू
चीखता हुआ इंसान
गर्भ पाल कर मजदूरी करती स्त्री पेड़ पर लटकता हुआ अन्नदाता बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण करने वाला मजदूर और हाथ फैला कर भीख मांगता हुआ बच्चा भारत का भविष्य नहीं बन सकता बन सकता है वो
केवल देशद्रोही, केवल देशद्रोही वह भारत का भाग्य विधाता भी बन सकता है जैसे इतिहासों में दर्ज है हज़ारो नाम
अम्बेडकर से लेकर कलाम तक लेकिन अब नहीं होगा ऐसा क्योंकि अब जो भी बनेगा इनकी तरह वह होगा देशद्रोही
वह होगा देशद्रोही
पता :-
सुमित चौधरी
शोधार्थी
भारतीय भाषा केंद्र
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली- 110067
मोबाइल-9654829861
Email.sumitchaudhary825@gmail.com



No comments:
Post a Comment